इन पौधों को लगाकर कर सकते हैं पितरों को तृप्त, ज्योतिष एक्सपर्ट से जानें

इन पौधों को लगाकर कर सकते हैं पितरों को तृप्त, ज्योतिष एक्सपर्ट से जानें

September 28, 2023

हिंदू धर्म में पितरों को बहुत महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि कई तरह के कर्मकांड किए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ पौधे भी ऐसे हैं जिन्हें लगाकर आप अपने पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं?

ज्योतिष एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ पौधों में पितरों का वास माना जाता है। इन पौधों को घर में लगाने से पितृ दोष दूर होता है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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इन पौधों को लगाकर कर सकते हैं पितरों को तृप्त, ज्योतिष एक्सपर्ट से जानें

हिंदू धर्म में पितरों को बहुत महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि कई तरह के कर्मकांड किए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ पौधे भी ऐसे हैं जिन्हें लगाकर आप अपने पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं?

ज्योतिष एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ पौधों में पितरों का वास माना जाता है। इन पौधों को घर में लगाने से पितृ दोष दूर होता है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पितरों को प्रसन्न करने वाले पौधे

  • पीपल का पेड़: पीपल का पेड़ पितरों का सबसे प्रिय पेड़ माना जाता है। पीपल के पेड़ में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास माना जाता है। इसलिए पीपल के पेड़ की पूजा-अर्चना करने से पितरों के साथ-साथ त्रिदेवों की भी कृपा प्राप्त होती है।
  • बेल का पेड़: बेल का पेड़ भी पितरों को प्रसन्न करने के लिए बहुत कारगर माना जाता है। बेल के पेड़ में भगवान शिव का वास माना जाता है। इसलिए बेल के पेड़ की पूजा करने से पितरों के साथ-साथ भगवान शिव की भी कृपा प्राप्त होती है।
  • केला का पेड़: केला का पेड़ भी पितरों को प्रसन्न करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। केला पितरों का प्रिय फल है। इसलिए घर में केला का पेड़ लगाने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
  • अशोक का पेड़: अशोक का पेड़ भी पितरों को प्रसन्न करने के लिए बहुत कारगर माना जाता है। अशोक के पेड़ में पितरों का वास माना जाता है। इसलिए घर में अशोक का पेड़ लगाने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
  • तुलसी का पौधा: तुलसी का पौधा भी पितरों को प्रसन्न करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। तुलसी में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इसलिए घर में तुलसी का पौधा लगाने से पितरों के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होती है।

पितरों को प्रसन्न करने के लिए पौधे लगाते समय ध्यान देने योग्य बातें

  • पितरों को प्रसन्न करने के लिए पौधे हमेशा घर के पूर्व या उत्तर दिशा में लगाएं।
  • पौधे लगाते समय पितरों का ध्यान करें और उनसे आशीर्वाद मांगें।
  • पौधों की नियमित पूजा-अर्चना करें।
  • पौधों को पानी देते समय पितरों के लिए तर्पण करें।
  • पौधों को सूखने न दें और उनकी अच्छी तरह से देखभाल करें।

पितरों को प्रसन्न करने के लिए पौधों का महत्व

पितरों को प्रसन्न करने के लिए पौधों का महत्व इस प्रकार से है:

  • 1. पितरों के आत्मा के लिए शांति: पितृ पक्ष के दौरान, हम अपने पितरों की आत्माओं को शांति देने का पुण्यकारी काम करते हैं। पेड़ों को रोपते समय, हम उनके नाम पर यज्ञ करते हैं जिससे उनकी आत्मा को आराम मिलता है।

    2. प्राकृतिक संरक्षण: पेड़ पौधों का रोपण केवल पितृ पक्ष के उपासना से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संरक्षण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। पेड़ अपने वातावरण को शुद्ध करने, वायुमंडल को सुधारने और जैव विविधता को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

    3. धार्मिक महत्व: हिन्दू धर्म में, पेड़ों का विशेष महत्व है। पीपल, बरगद, नीम, आम के पेड़ और अन्य कई पेड़ों को धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। पितृ पक्ष के दौरान इन पेड़ों के रोपण से विशेष आध्यात्मिक लाभ होता है।

    4. योगदान के रूप में: पेड़ों का रोपण करना एक योगदान की भावना भी है, जिससे आत्मा को शुद्धि मिलती है। यह भावना हमें अपने समय के साथी के प्रति आदर और आभार रखने की भावना को प्रोत्साहित करती है।

    5. आत्मा के पुण्य का भंडार: पितृ पक्ष के रूप में एक यज्ञ के रूप में पेड़ों का रोपण करने से हम आत्मा के पुण्य का एक भंडार बनाते हैं। यह हमें अच्छे कर्मों का फल और आत्मा की शांति का अनुभव कराता है।

निष्कर्ष

इस पितृ पक्ष में, हम पेड़ों के रोपण से न केवल अपने पूर्वजों का समर्थन करते हैं, बल्कि प्राकृतिक संरक्षण और आध्यात्मिक उन्नति का भी हिस्सा बनते हैं। यह एक प्राचीन और महत्वपूर्ण परंपरा है जो हमारे कर्मों को और हमारे पर्यावरण को सुधारने का एक संदेश देती है। यह आपकी आत्मिक और आध्यात्मिक विकास का साक्षर है और हमारे पूर्वजों के प्रति आभार और स्नेह का प्रतीक है।

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